अडानी और अंबानी कौन होगा भविष्य की ऊर्जा का मालिक?

Written By: FirstU Team | New Delhi


गौतम अडानी (Gautam Adani) और मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के बीच कंपिटिशन चल रहा है. कंपिटिशन है क्लीन एनर्जी स्पेस में आगे निकलने का क्लीन कहे या ग्रीन इस एनर्जी स्पेस के खेल में आगे निकलने के लिए अडाणी ग्रुप (Adani Group) ने क्लीन एनर्जी से जुड़ी टेक्नोलॉजी पर अगले 10 साल में बहुत बड़ा निवेश करने का ऐलान कर दिया है। क्या है पुरी खबर आज की चर्चा इसी पर लेकिन पहले थोड़ा सा ज्ञान ग्रीन एनर्जी पर लेते चलें...

  • प्राकृतिक संसाधनों-धूप, हवा या पानी से मिलने वाली ऊर्जा ग्रीन एनर्जी कहलाती है।
  • ग्रीन एनर्जी यानी रिन्यूएबल एनर्जी से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता।
  • क्योंकि इससे फॉसिल फ्यूल यानी कोयला और पेट्रोलियम की तरह नुकसानदेह ग्रीन हाउस गैस नहीं पैदा होती।

अब आते है आज की खबर पर गौतम अडाणी (Gautam Adani) की योजना ग्रीन हाइड्रोजन प्रॉडक्शन में एंट्री करने के साथ, सभी डेटा सेंटर को रिन्यूएबल एनर्जी से पावर देने और अपने पोर्ट को 2025 तक नेट जीरो कार्बन बनाने की है। आपको याद होगा इससे पहले इंटरनेशनल क्लाइमेट समिट में मुकेश अंबानी ने देश को एनर्जी प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनने की बात कही थी. साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2035 तक नेट जीरो कार्बन कंपनी बनाने का लक्ष्य रखा था। इस रेस में आगे निकलेने के लिए अडानी और अंबानी कतना पैसा लगाने वाले है. अगर इस पर नजर डालें तो...

  • जहां मुकेश अंबानी की रिलायंस नए एनर्जी कारोबार पर अगले 3 साल में 75 हजार करोड़ निवेश करेगी।
  • तो वहीं, अडानी क्लीन एनर्जी से जुड़ी टेक्नोलॉजी पर अगले 10 साल में 1.47 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश करने जा रहे हैं।
  • अडाणी 2030 तक अपने ग्रुप को दुनिया की सबसे बड़ी बिजली कंपनी बनाना चाहती है।
  • इसके लिए 2025 तक के लिए जो पूंजीगत निवेश की योजना है, उसका 75% से ज्यादा हिस्सा ग्रीन टेक्नोलॉजी में लगाया जाएगा। 

अडानी ग्रुप अगले चार साल में रिन्यूएबल पावर एनर्जी जेनरेशन कैपेसिटी को तीन गुना करेगा। अडानी के मुताबिक, ऊर्जा पैदा करने की ग्रुप की यह कैपेसिटी अभी 21% है जिसे 63% तक ले जाया जाएगा। इसके अलावा, 10 साल में रिन्यूएबल एनर्जी जेनरेशन, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर 20 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, वहीं अंबानी की

  • RIL 60 हजार करोड़ रुपए की लागत से गुजरात के जामनगर में 4 गीगा फैक्ट्री बनाएगी।
  • वहां सोलर पैनल, बैट्रीज, ग्रीन हाइड्रोजन और फ्यूल सेल बनाएगी। 
  • कंपनी 15 हजार करोड़ रुपए वैल्यू चेन, पार्टनरशिप और भविष्य की टेक्नोलॉजी में निवेश करेगी।

कुल मिलाकर, रिलायंस का 2030 तक 100 गीगावाट की सोलर एनर्जी की क्षमता तैयार करना है...मुकेश अंबानी को पता है इस वक्त ग्लोबल वॉर्मिंग ने दुनिया की चिंता बढ़ाई हुई है. ग्लोबल वॉर्मिंग से तभी बचा जा सकता है जब दुनिया में रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़े मुकेश अंबानी का रिलायंस को अगले 15 साल में कार्बन मुक्त कंपनी बनाने का लक्ष्य है देश में बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण के साथ इसके निर्यात की भी योजना है. अब सवाल आता है की ये काम कैसे करेगा।

  • इसके लिए गाड़ियों में फ्यूल सेल लगेंगे।
  • फ्यूल सेल को बैटरी मान सकते हैं जिसमें कैथोड और एनोड नाम के इलेक्ट्रोड लगे होते हैं।
  • इन इलेक्ट्रोड के माध्यम से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और उसी से ऊर्जा पैदा की जाती है।

दरअसल फ्यूल सेल ही हाइड्रोजन गैस की खपत करेंगे और ऊर्जा देंगे. अंत में अवशेष के रूप में पानी बचेगा. इसमें धुआं निकलने की गुंजाइश बिल्कुल नहीं है. हाइड्रोजन गैस को पैदा करने के लिए प्राकृतिक गैस, आण्विक ऊर्जा, बायोमास, सोलर और वायु ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा. इस ऊर्जा को कार और बड़ी गाड़ियों में लगा सकते हैं. घरों में भी बिजली के रूप में इसका इस्तेमाल हो सकेगा. तो हुआ ना ये भविष्य का ईंधन और उम्मीद है की ये आज के तेल या गेस से सस्ता भी पड़ेगा। लेकिन इस रेस में कौन आगे निकलता है यो तो आने वाला वक्त ही बताएगा। 

 

 


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