Mystery of Death Valley

Written By: FirstU Team | New Delhi

क्या है Death Valley का रहस्य?

दुनिया में कई ऐसे रहस्य हैं जो आज भी अनसुलझे हैं. इन रहस्यों को विज्ञान भी समझ नहीं पाया है. आज हम दुनिया के उन अनसुलझे रहस्य में से एक के बारे में आपको बताने वाले हैं जिसे जानकर आप भी हैरान रह जायँगे तो चलिए बिना देरी करे शुरू करते हैं. क्या आपने कभी किसी पत्थर को खुद से चलते देखा है. आप सोच रहे होंगे... क्या बेवकुफों वाली बात है... भला कोई पत्थर खुद से कैसे चल सकता है... लेकिन जनाब यकिन मानिएं एसा सच में हो रहा है. चलिए आपको भी ले चलते हैं डेथ वैला के सफर पर. अरे जनाब डरिए मत... दरअसल,  डेथ वैली वो जगह है जहां के पत्थर खुद ब खुद चलते हैं... अमेरिका के पूर्वी कैलिफॉरनियां और नेवादा के बीच में है ये डेथ वैली... इस को डेथ वैली नैशनल पार्क के नाम से भी जाना जाता है... अभी तक आप अपने राजस्थान के इलाकों को ही तापमान के लिहाज से सबसे गरम मानते होंगे... लेकिन जनाब डेथ velly तो इतना गरम है की गिनेस बुक वालो को भी अपने या रेकॉर्ड में दर्ज करना पड़ गया... जी हैं डेथ velly का तापमान पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा 56.7 डिर्गी सेलसियस दर्ज किया गया है... 

ये घाटी रंग-बिरंगी चटानो से भरी है। इसे देखने के लिए पर्यटको की भीड़ लगी रहती है। यहां एक हैरान करने वाली बात ये भी है कि समुंद्र तल से 282 फीट नीचे होने के बाद भी यह घाटी एकदम सूखी है। यहां आपको पानी एक बूंद भी देखने को नहीं मिलेगी... लेकिन ये वैली सुर्खियों में रहती है तो खुद ब खुद खिसकने वाले पतरों की वजह से...  इन पत्थरों को सेलिंग स्टोन्स के नाम से जाना जाता है... यहां बिखरे पतरों के पीछे आड़ी-टेढी लकीरें आज भी दिखती हैं। इस घाटी में करीब 150 से अधिक पत्थर ऐसे है जो सर्दियों मे करीब 250 मीटर से अधिक दूर तक खिसक जाते हैं... हालांकि, कमाल की बात तो ये है की आज तक किसी ने उन्हे आंखो से खिसकते नहीं देखा। अपने आप खिसकने वाले इन पत्थरों के रहस्य को सुलझाने के लिए सन 1972 में वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई। टीम ने पत्थरों पर सात साल तक अध्यन किया। लेकिन हाथ कुछ भी नही लगा। लेकिन वैज्ञानिक उस वक्त चौंक गए जब कुछ साल बाद उन्होनें एक अनोखा दर्शय देखा। केरीन नाम का लगभग 317 किलोगाम का पत्थर अध्यन के दौरान जरा भी नही हिला था। लेकिन जब वैज्ञानिक कुछ साल बाद वहां वापस लौटे, तो उन्होने केरीन नाम के इस पत्थर को 1 किलोमीटर
दूर पाया।

वैज्ञान क्या कहता है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण ये पत्थर खिसक जाते है, वहीं कुछ लोगो का कहना है कि ये कमाल एलियंस कर के दिखा रहे हैं... यानी एलियंस उन पत्थरों को अपनी जगह से दुसरी जगह खिसका देते हैं... तो वहीं कुछ मैगेटिक फील्ड को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं। और कुछ लोगो का तो कहना है की इसके पीछे आत्माओं का हाथ भी हो सकता है, खेर जो भी हो... जितने मुंह उतनी बाते... हालाकिं, इनमें से सच कुछ भी हो सकता है... हम एसा इसलिए कह रहे हैं... क्योकिं, 19वीं शताबी के शुरुआती वर्षों में सोने-चांदी की खदानो की खोज में निकलने वाले लोग जब इस इलाके से गुजरते थे... तो उनकी मौत हो जाती थी। कुछ साल पहले नासा के एक वैज्ञानिक राफ लॉरेंज ने इसकी वजह पता लगाने का दावा किया था। दरअसल, डेथ वैली या कहें मौत की घाटी में... रेसटैक पाया नाम का एक एरिया है जहां पहले कभी झील हुआ करती थी। अब वे झील सुख गई है और पूरा इलाका समतल जमीन है उनका कहना था कि झील की सतह पर कुछ पानी रहता है जो ठंड मे जम जाता है और झील की सतह पर कुछ पत्थर मौजूद है जिसके नीचे का पानी पत्थर बनकर उनसे चिपका रहता है। फिर जब मौसम गर्म होता है तो पत्थर से चिपकी बर्फ पिघल जाती है... जिससे झील की सतह पर थोड़ा पानी जमा हो जाता है। फिर जब हवा चलती है... तो दबाव पड़ने की वजह से पत्थर आगे खिसकने लगते हैं और बर्फ की वजह से झील की सतह पर
निशान पड़ जाता है। हालांकि इन पत्थरों के खिसकने की सही वजह क्या है... ये अभी तक कोई दावे के साथ नही बता सका है। इसलिए डेथ वैली के ये खिसकने वाले पत्थर आज भी एक रहस्य ही बना हुए हैं... वैसे आपको क्या लगता है... कैसे खिसकते होंगे ये भारीभरकम पत्थर आपने आप...