The story behind the war between Israel and Palestine

Written By: Gaurav Pandey | New Delhi

दुनिया भर में आज चर्चा का विषय बना हुआ है जेरुसलम का अल-अक्सा मस्जिद, कारण है फिलिस्तीनियों और इजरायली सुरक्षा बलों के बीच 10 मई को हुई झड़प. इस हमले में दर्जनों फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारी घायल हुए. सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो में हमने देखा कि कैसे फिलिस्तीन के चरमपंथी गुट इजरायल पर ताबड़तोड़ रॉकेट दाग रहे हैं. लेकिन इजरायल की मिसाइल रोधी सिस्टम के चलते उसे उतना नुकसान नहीं पहुंचा, जितना इजरायल के हमले से गाजा को नुकसान हुआ।

हालांकि इजरायल के हवाई हमले में गाजा में काफी तबाही देखने को मिली. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा पर इजरायल के हमले में अब तक कम से कम 83 लोग मारे गए. जिनमें 17 मासूम बच्चे भी शामिल हैं. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इजरायल के हमले में सैकड़ों घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है. आपको याद दिला दें कि गाजा पर इजरायल के नए हमले में एक 6 मंजिला इमारत ध्वस्त हो गई थी, जिसमें बताया गया कि यहां फिलिस्तीनियों के चरमपंथी गुट हमास का ठिकाना था।

अब यहां सवाल ये उठता है की आखिर ये लड़ाई क्यों शुरू हुई?

दरअसल ये मामला एक छोटे से प्लॉट का है जो आज की तारीख में दुनिया की सबसे विवादित जगहों में से एक है. वजह है कि इसपर दुनिया के तीन बड़े धर्म अपना अपना दावा कर रहे हैं. इस कन्फ्लिक्टिंग दावेदारी के चलते कई बार आपस में इनके बीच युद्ध भी हुए. लगातार इनके बीच तनाव भी बना रहा. और इसी तनाव में एक बड़ा मोड़ आया 10 मई को. इस दिन दुनिया के सबसे पुराने, सबसे पवित्र माने जाने वाले शहरों में से एक पर रॉकेट दागे गए. इसके जवाब में हुई हवाई बमबारी. दुनियाभर के नेता तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं. ट्विटर पर दोनों गुटों के समर्थन में अलग-अलग हैशटैग चल रहे हैं. 

आईए क्या है ये पूरा मामला, विस्तार से समझते हैं। 

जेरुसलम शहर के पुराने हिस्से में एक पहाड़ी के ऊपर फैला एक प्लेटफॉर्म है. इसका एरिया करीब 35 एकड़ है. इस कंपाउंड को यहूदी पुकारते हैं, हर हबायित. ये हिब्रू भाषा का शब्द है. इस नाम का प्रचलित अंग्रेज़ी मतलब है- टेम्पल माउंट. इसी परिसर को मुस्लिम बुलाते हैं हरम-अल-शरीफ़. अब यहां सवाल ये भी उठता है की आखिर एक ही जगह के अलग-अलग नाम क्यों? दरअसल इसका कारण है, दोनों धर्मों की अपनी-अपनी मान्यताएं. यहूदी मानते हैं कि इसी जगह पर उनके ईश्वर ने वो मिट्टी संजोई थी, जिससे ऐडम का सृजन हुआ. ऐडम, वो पहला पुरुष, जिससे इंसानों की भावी पीढ़ियां अस्तित्व में आईं. इसके अलावा यहूदियों के एक पैगंबर थे, अब्राहम. अब्राहम के दो बेटे थे- इस्माइल और इज़ाक. एक रोज ईश्वर ने अब्राहम से उनके बेटे इज़ाक की बलि मांगी. ये बलि देने के लिए अब्राहम ईश्वर की बताई जगह पर पहुंचे. यहां अब्राहम इज़ाक को बलि चढ़ाने ही वाले थे कि ईश्वर ने एक फ़रिश्ता भेजा.

अब्राहम ने देखा, फ़रिश्ते के पास एक भेड़ खड़ा है. ईश्वर ने अब्राहम की भक्ति और उनकी श्रद्धा देखकर इज़ाक को बख़्श दिया. उनकी जगह बलि देने के लिए भेड़ को भेजा. यहूदियों के मुताबिक, बलिदान की वो घटना इसी टेम्पल माउंट पर हुई थी. इसीलिए इजरायल के राजा किंग सोलोमन ने करीब 1,000 ईसापूर्व में यहां एक भव्य मंदिर बनवाया. यहूदी इसे कहते हैं- फर्स्ट टेम्पल. आगे चलकर बेबिलोनियन सभ्यता के लोगों ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया.

तकरीबन पांच सदी बाद, 516 ईसापूर्व में यहूदियों ने दोबारा इसी जगह पर एक और मंदिर बनाया. वो मंदिर कहलाया- सेकेंड टेम्पल. इस मंदिर के अंदरूनी हिस्से को यहूदी कहते थे- होली ऑफ़ होलीज़ जिसका मतलब था पवित्र से भी पवित्र. ऐसी जगह, जहां आम यहूदियों को भी पांव रखने की इजाज़त नहीं थी. केवल श्रेष्ठ पुजारी ही इसमें आते-जाते थे. ये सेकेंड टेम्पल करीब 600 साल तक वजूद में रहा. सन् 70 में रोमन्स ने इसे तोड़ दिया. इस मंदिर की एक दीवार आज भी मौजूद है. इसे कहते हैं- वेस्टर्न वॉल. ये दीवार उस प्राचीन सेकेंड टेम्पल के बाहरी अहाते का हिस्सा मानी जाती है. यहूदी अपनी ये मान्यताएं तो जानते हैं. मगर उन्हें ये नहीं पता कि मंदिर का भीतरी हिस्सा, यानी वो होली ऑफ़ होलीज़, टेम्पल माउंट के किस हिस्से में था. चूंकि प्राचीन समय में आम यहूदियों को वहां जाने की छूट नहीं थी. कई धार्मिक यहूदी आज भी ऊपरी अहाते में पांव नहीं रखते. वो वेस्टर्न वॉल के पास ही प्रार्थना करते हैं.

ये तो हुई यहूदी मान्यता. अब बात करते हैं इस मामले के दूसरे पक्ष, यानी मुसलमानों की. उनका क्या दावा है? मुस्लिमों के मुताबिक, इस्लाम की सबसे पवित्र जगहों में पहले नंबर पर है मक्का. दूसरे नंबर पर है मदीना. और तीसरे नंबर पर है, हरम-अल-शरीफ़. यानी जेरुसलम का वो 35 एकड़ का अहाता. इस इस्लामिक मान्यता का संबंध है क़ुरान से. क़ुरान के मुताबिक, सन् 621 के एक रात की बात है. पैगंबर मुहम्मद एक उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर मक्का से जेरुसलम आए. यहीं से वो ऊपर जन्नत में चढ़े. यहां उन्हें अल्लाह के दिए कुछ आदेश मिले.

अल्लाह के दिए उस आदेश मेॆ क्या था?

क्या था इस आदेश में? इसमें बताया गया था कि इस्लाम के मुख्य सिद्धांत क्या हैं. दिन में पांच बार नमाज़ पढ़ना. सन् 632 में पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु हुई. इसके चार साल बाद मुस्लिमों ने जेरुसलम पर हमला कर दिया. तब यहां बैजेन्टाइन साम्राज्य का शासन था. मुस्लिमों ने जेरुसलम को जीत लिया. आगे चलकर उम्मैयद खलीफ़ाओं ने जेरुसलम में एक भव्य मस्जिद बनवाई. इसका नाम रखा- अल अक्सा. अरबी भाषा में अक्सा का मतलब होता है, सब से ज़्यादा दूर. इसी अल-अक्सा मस्ज़िद के सामने की तरफ़ है, एक सुनहरे गुंबद वाली इस्लामिक इमारत. इसे कहते हैं- डोम ऑफ़ दी रॉक.

मुस्लिम मानते हैं कि सदियों पहले उस रात को उड़ने वाले घोड़े पर सवार पैगंबर मुहम्मद ने जेरुसलम में पहली बार जहां पांव रखा, उसी जगह पर है अल-अक्सा मस्जिद. जिस जगह से उठकर वो उस रात जन्नत चढ़े थे, वहीं पर है डोम ऑफ रॉक. और ये दोनों इमारतें उसी 35 एकड़ वाले आयताकार कंपाउंड के भीतर, जिसे यहूदी अपने प्राचीन मंदिरों की लोकेशन मानते हैं. 

फिर साल 1948 में गठन हुआ, इजरायल का. उसी ज़मीन पर, जहां फ़िलिस्तिनियों का देश था. फ़िलिस्तीन और इजरायल, दोनों के अपने-अपने दावे थे. फ़िलिस्तीन का कहना था कि हमारे देश में दूसरा देश कैसे बनेगा? उनकी मांग थी कि कहीं और बनाया जाए यहूदी देश. मगर यहूदी इसके लिए राज़ी नहीं थे. उनका कहना था कि वो कहीं और क्यों जाएंगे. ये ज़मीन तो उनके पुरखों की है. उन्हें सदियों तक उस ज़मीन से बेदखल रखा गया. अब उन्हें अपनी ज़मीन वापस चाहिए.

लेकिन दोनों तरफ के कट्टरपंथी इससे नाखुश थे. कट्टरपंथी मुस्लिम इस परिसर में गैर-मुस्लिमों के घुसने से नाराज थे. वहीं कट्टरपंथी यहूदी कहते थे कि उनको टेम्पल माउंट में प्रार्थना का अधिकार मिले. इसी कट्टरपंथ का एक नतीज़ा सामने आया 1982 में. इस बरस ऐलन गुडमैन नाम का एक इज़रायली सैनिक पवित्र परिसर में स्थित ‘डोम ऑफ़ दी रॉक’ में घुस गया. उसने मशीनगन से फायरिंग शुरू कर दी. इस वारदात में दो लोग मारे गए.

इस घटना के बाद यहूदियों और मुस्लिमों के बीच भी तनाव बढ़ा. दरअसल यहूदी परिसर के पास वेस्टर्न वॉल के सामने प्रार्थना करते, तो कई बार परिसर के भीतर से मुस्लिम उनपर पत्थर फेंकते. इसके चलते यहूदियों में भी टेम्पल माउंट पर अपना दावा मज़बूत करने की जिद बढ़ती गई. इसी दावे का एक मशहूर एपिसोड साल 2000 में सामने आया. इस बरस इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एरियल शेरन खूब भारी-भरकम सुरक्षा के बीच टेम्पल माउंट पहुंचे. इस बार उनका मकसद था, इजराल का अधिकार स्थापित करना. इस मामले के बाद जमकर बवाल कटा.

तो कुल मिलाकर कहानी ये थी. मामला सारा एक जमीन को लेकर है जहां आपस में दो धर्म अपनी अपनी आस्था लिए अपने इश्वर के होने का दावा कर रहे हैं. अब ताजा हालात ये हैं की पिछले हफ्ते जेरुसलम की अल-अक्सा मस्जिद में नमाजियों पर इजरायली सुरक्षा बलों के हमले के बाद भड़की हिंसा अब जंग की तरफ बढ़ती नजर आ रही है. गाजा की सीमा पर इजरायल ने अपने सैनिकों को जमीन से लड़ने के लिए भेज `दिया है. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली हमले की आशंका के चलते गाजा में कई लोग अपने घरों को छोड़कर जा रहे हैं.